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Tuesday, May 29, 2012

'बाप' के खून का प्यासा

लो जी खबर आ रही है कि तिवारी जी के खून का नमूना मिल गया है ... वैसे भई तिवारी जी बहुत दूर की सोचते है ... जो लड़का उनका बेटा घोषित होने के लिए उनके खून का प्यासा बना बैठा है ... वो बेटा घोषित होने पर क्या क्या कर सकता है ... यह सोच सोच डर तो लगता ही होगा !

8 comments:

Suresh kumar said...

Dekhte hain kaya hota hai...

shikha varshney said...

हम्म ...

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत सुन्दर!

ब्लॉग बुलेटिन said...

इस पोस्ट के लिए आपका बहुत बहुत आभार - आपकी पोस्ट को शामिल किया गया है 'ब्लॉग बुलेटिन' पर - पधारें - और डालें एक नज़र - दो पटरी पे दौडी रेल ..देखो पोस्ट की ठेलमठेल

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

:):)

Vinamra said...

जब सुभाष चन्द्र बोसे ने "तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हे आज़ादी दूंगा" का नारा दिया था, तब उन्होंने शायद ही सोचा होगा की तिवारी साहब को खून देने के लिए कोर्ट से बुलवाना होगा!!

कुमार राधारमण said...

हां,अब तो "कुत्ते-कमीने मैं तेरा खून पी जाउंगा" वाले डायलॉग का जमाना भी न रहा।

कुमार राधारमण said...
This comment has been removed by the author.

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