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Friday, April 6, 2012

लौट आ किसी बहाने से

मैनपुरी नगरपालिका सफाई कर्मचारी को समर्पित :-

"बहुत उदास है कोई तेरे जाने से;
हो सके तो लौट आ किसी बहाने से;
तू लाख खफा सही पर आ कर एक बार तो देख;
कितना कचरा जमा है तेरे न आने से!"

9 comments:

Ratan singh shekhawat said...

हर शहर में रहने वालों की दिल की बात

दर्शन कौर 'दर्शी' said...

वाह ! कहने वाले के दिल की दुआ हैं या बद्दुआ ...सफाई कर्मचारि तोबा ! आजकल तो शहनशा यहीं हैं भाई जी....

Vibha Rani Shrivastava said...

"बहुत उदास है कोई तेरे न आने से
आ जाओ patna के किनारे भी "

Anupama Tripathi said...

badhia likha hai ...

SKT said...

शायद इसीलिए कहते हैं कि कवि का दर्द सारे जमाने का दर्द होता है!लोकल किन्तु ग्लोबल...

Deepak Shukla said...

Shivam ji....

Wah....

Aapke safayi karmik ka jawab yahan aa gaya hai galti se:-

Kachra na uthane pe,
aise bula rahe hain....
Jaise kisi shadi ka....
Nyota dila rahe hain....

Ghar ko jo saaf karke..
Galiyon main fenken kuda...
Apni gali main jhadu...
Wo khud laga rahe hain..

Holi-diwali jinke....
Dar-dar bhatkta rahta....
Mere hi dar ke chakkar...
Wo roz kha rahe hain...

Humko nahi hai jaana..
Kooda nahi uthana..
Karna bhale pade kuchh..
Vapas hai nahi aana....

.............


Karte hain jab safayi...
Jhadu laga-laga ke...

शिवम् मिश्रा said...

@ दीपक जी आपका आभार ! वैसे यही रचना मैं आपके ब्लॉग पर भी देखना चाहूँगा !

Maheshwari kaneri said...

बहुत बढ़िया....

पंछी said...

nice :)
मत भेद न बने मन भेद - A post for all bloggers

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