Pages

Followers

Friday, April 19, 2019

नेता और जन समस्या



नेता जनता की समस्याओं को उतनी ही गंभीरता से लेते हैं,
जितना हम सिगरेट, तंबाकू के पैकेट पर लिखी कैंसर की चेतावनी को!

Thursday, November 10, 2016

अपनी अपनी औकात

वैसे, जिसकी जितनी औकात होती है वो उतने ही बड़े फ़ैसले लेता है,कांग्रेस ने चवन्नी बन्द की थी।


...न माने सिर्फ़ बता रहे हैं।

#BlackMoneyCrackDown

Sunday, July 24, 2016

डिग्री का अटेस्टेशन जरूर करवाएँ

एक बार मैनपुरी दौरे के दौरान, एक छात्र ने मुलायम सिंह जी से शिकायत की : "सर जी, आप ने मैनपुरी को कटौती रहित बिजली सप्लाई के आदेश करवाए हुये हैं फिर भी बिजली नहीं आती ... हम लोगों की पढ़ाई नहीं हो पाती ... कुछ जुगाड़ हो जाती तो ..."

मुलायम सिंह जी : "हम नितीश कुमार जी से कह के कुछ इंतजाम करवाते हैं।"
 
छात्र: "बिजली का?"
 
मुलायम सिंह जी : "नहीं, तुम्हारी डिग्री का।"
 
छात्र: "वो तो ठीक है पर डिग्री केजरीवाल जी से अटेस्ट जरूर करवा देना, बाद में कोई लफड़ा नहीं चाहिए मुझे ... जैसा स्मृति जी या मोदी जी के साथ हुआ !!"

(कृपया लतीफ़े को लतीफ़ा समझ कर ही आनंद लें ... राजनीतिक भावनाओं के आहात होने की स्थिति में आप स्वंय जिम्मेदार होंगे !!)

Thursday, June 16, 2016

क्या रखा है इस किताबी संसार में

"क्या रखा है इस किताबी संसार में,
आओ बिना पढ़े टॉप करें बिहार में।"

Monday, May 9, 2016

कच्छों के छेद

वैज्ञानिकों के गहन शोध के बाद सर्वसम्मति से यह निष्कर्ष निकला कि एक औसत भारतीय के कच्छे में कम से कम साढ़े तीन छेद तो जरूर होते ही है।

परंतु कुछ अति बुद्धिजीवियों ने इस निष्कर्ष पर प्रश्नवाचक चिन्ह लगाते हुए प्रत्येक व्यक्ति के कच्छे की अनिवार्य रूप से गहन जांच की मांग की।

किंतु वे यह भूल गए कि ऐसे में उन के कच्छों के छेदों का पूरा विवरण भी जांच के बाद प्रकाश में आएगा और हो सकता है कि ऐसे में उन के कच्छे उन की लाज़ न बचा पाएं।

न दूसरों के कच्छों के छेद गिनो न अपनी लाज़ उतरवाओ।

नोट :- आप से अनुरोध है कि इस पूरे प्रकरण को नेताओं के डिग्री विवाद से जरूर जोड़ कर देखें।

Saturday, November 7, 2015

ऐसे वैसों को दिया है, कैसे कैसों को दिया है

अब समझ में आया दरअसल 'अदनान सामी' ने जो "ऐसे वैसों को दिया है कैसे कैसों को दिया है" कहा था वो इन सम्मान लौटाने वालो के बारे में ही कहा था।

Monday, August 3, 2015

मेहनती सुप्रीम कोर्ट

शराबी ने ठेके का दरवाज़ा खटखटाया।
ठेके वाला: क्या है?
शराबी: दारू है?
ठेके वाला: चल भाग साले... रात के 2 बजे हैं।
शराबी: कामचोर साले, तू सुप्रीम कोर्ट से बङा है क्या? जब वो रात को जाग कर काम कर सकती है तो तू क्यों नही?