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Tuesday, June 26, 2012

इमरजेंसी के ३७ साल

३७ साल पहले एक इमरजेंसी लगी थी देश में और एक इमरजेंसी अब लगी है देश की जनता के बजट में ... सरकार तब भी काँग्रेस की थी ... सरकार अब भी काँग्रेस की है ... सरकार तब भी एक महिला चलती थी ... सरकार अब भी एक महिला ही चलती है ... विपक्ष तब भी होते हुये नहीं सा था ... विपक्ष अब भी होते हुये नहीं सा है ... जनता तब भी मजबूर थी ... जनता अब भी मजबूर है ... कोई बताएगा इन ३७ सालों मे भला क्या बदला ... सिवाए फेसबूक, ट्वीटर, गूगल +, ऑर्कुट के ???

4 comments:

ब्लॉग बुलेटिन said...

आपके इस खूबसूरत पोस्ट का एक कतरा हमने सहेज लिया है आपातकाल और हम... ब्लॉग बुलेटिन के लिए, पाठक आपकी पोस्टों तक पहुंचें और आप उनकी पोस्टों तक, यही उद्देश्य है हमारा, उम्मीद है आपको निराशा नहीं होगी, टिप्पणी पर क्लिक करें और देखें … धन्यवाद !

देवांशु निगम said...

कुछ नहीं बदला, हाँ ये ज़रूर देख लिया की एक लोकतंत्र किस किस तरह से "फेल" हो सकता है !!!!

Dr.Ashutosh Mishra "Ashu" said...

naagon kee hee paliya hain naagon ke hee dal hain..naagon ne hee kar liye gathbandhan hain.nagino se nevlon se bicchuon se sath gath..njaane kaise chal raha mera loktantra hai...sadar badhayee aaur sadar amantran ke sath

dhiru singh {धीरू सिंह} said...

bilkul theek kaha

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